डायरी
भोजन करने के पश्चात आज भी वो छत पर गया और टहल रहा था, लेकिन आज उसका दिल बेतहासा धड़क रहा था, दो मिनट के बाद सहसा फ़ोन की ओर निहारने लगा ,अंधेरी रात में फ़ोन के स्क्रीन के प्रकाश में उसकी आँखे दिख रही थी जो आँसुओ से भरी थी और वो ऐसा कोशिश कर रहा था मानो आंसू आंख से गिरने न पाए, अब पवन ने भी मन्द मन्द मुस्कुराना शुरू किया और ऊपर बिजली तड़क रही थी ,हल्की हल्की बारिश भी आनी शुरू हो गयी लेकिन अभी भी कुछ पसीने की बून्द उसके माथे पर साफ झलक रही थी , वह सकरात्मक सोचने का प्रयास कर रहा था,वह शांत दिखना चाह रहा था लेकिन वो अंदर से बेचैन हो रहा था, उसने जल्दी से सीढियो की तरफ कदम बढ़ाये और नीचे अपने कमरे में आकर लाइट बन्द करके लेट गया और फिर करीब दो घण्टे वो चौक कर उठा और लाइट ऑन की और कॉपी कलम लेकर बैठ जाता है और लिखता है- सुनो न ,तुम रोज मेरे सपने में आती हो और मेरा नाम पुकारती हो ,मैं रोज़ इस का इंतेज़ार करता हूँ और तुम्हारी आवाज़ सुनकर दौड कर जाता हूँ और तम्हे गले से लगा लेता हूं और उसके बाद मैं तुम्हारे पास बैठकर तुम्हारे आंखों को निहारता हूँ और महसूस करता हूं की इश्वर ने तुम्हे सिर्फ मेरे लिये ...