बुद्धिमान कौन
"अगर दुश्मन को खत्म करना है तो उसकी तारीफ करना शुरू कर दो, तारीफ के वो शब्द उसके अंदर निश्चित तौर पर अहंकार पैदा कर देंगे और वही अहंकार उसके ज्ञान का नाश कर देगा"
यही कोई मेरी उम्र पांच वर्ष से भी कम रही होगी , उस उम्र में ही मेरे चर्चे दूर दूर तक होने लगे थे और कारण था मेरे उस छोटी सी उम्र में ही मेरे अंदर की असाधारण (एक्स्ट्राआर्डिनरी) बाते, चाहे वो शिक्षा के मामले में हो या संस्कार के, घर के बडा लड़का होने के कारण सब कोई मेरे ऊपर ध्यान देता था, स्कूल से लेकर ,गांव, रिश्तेदारी , जिधर देखो अरे "फलाना के लड़का" बहुत तेज ब पढ़े में ....
और मैं भी बहुत खुश होता था और उसी समय मुझे लगने लगा कि हा मैं सच मे बहुत बुद्धिमान हूं और मेरे अंदर भी अब तारीफ की भूख बढ़ गई थी और ऐसा सामन्यतः होता भी है,
जब कोई पूछता तो 'बाबू आगे क्या बनोगे"
मैं तो मानो इस सवाल के लिए पहले से ही तैयार रहता था, गर्व से दुनिया की सबसे बड़ी चीज जो मुझे लगती थी ,वही बोल देता था,😀
उस समय जब कोई पिता अपने लड़के को समझाता था तो मेरा उदाहरणस्वरूप मेरा मेरा नाम लेता था,
लेकिन गांव - देहात में लोग एक कहावत कहते है, " सहारल बहुरिया डोम घरे जाली"।
कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ और इन्ही सब के होड़ में मैं सिर्फ एक किताबी कीड़ा बनकर रह गया ।
ये तो खैर हुई बचपन की बात और जैसे जैसे दुनिया मे मैं निकलने लगा मुझे वास्तविकता का बोध होने लगा,
मेरा आत्मविश्वास धीरे धीरे टूटने लगा .. लेकिन फिर भी मैं बुद्धि में अपने आप को बहुत बुद्धिमान मानता था, और इनदिनों मुझे लोगो के मन को पढ़ने का शौक चढ़ा था,
और इसी क्रम में जिसको मैं मूर्ख मानता था उसके समक्ष मैं मूर्ख होंने का अभिनय करने लगा ,कुछ अटपटा कुछ असमान्य होने का अभिनय और जबाब में वो मुझे मूर्ख समझने लगे,
और मैं खुद को वास्तविक जीवन का कलाकार समझने लगा,
तत्पश्चात जिन्हें मैं अपना करीबी मानता था, उनके साथ ये प्रयोग करना शुरू किया और जो मुझे बहुत बढ़िया से जानते थे,
मैं जानबूझकर कुछ गलत बाते अपने ही बारे में बताता था और धीरे कुछ दिन में वे लोग भी मुझे मूर्ख समझने लगे,
अब वे भी मुझसे ऐसे वर्ताव करते है जैसे मैं सच मे चोर हूं, मूर्ख हूं ,
दरअसल , मेरा मानना ये था कि जो आपके रियल टैलेंट से परिचित होंगे , वे अगर आपकी लाख बुराइयां भी सुनेंगे तो यकीन न करेंगे, लेकिन मैं गलत था,अगर आप बहुत बड़े विद्वान है फिर भी अगर खुद को दुनिया के सामने जैसा प्रस्तुत करेंगे दुनिया वैसा ही देखेगी और समझेगी,
लोगो को आपकी तरक्की सुनने पर उतना जल्दी विश्वास नही होगा जितनी कि आपका पतन .....
लेकिन उनका तो पता नही लेकिन मुझे अब लगने लगा है कि हां सच में दुनिया का सबसे बड़ा मूर्ख हूं,🙄🤔🤔
अगर आप मेरी निरर्थक कहानी पढ़कर यहाँ तक आ गए है तो आप बताइए मूर्ख कौन और बुद्धिमान कौन? ,